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Friday, August 22, 2014

किसान अनाज है

इस कहावत दिलचस्प है, तो एक व्यक्ति इस कविता का अध्ययन करने की जरूरत है. भगवान व्यक्ति के जीवन में आशीर्वाद देता है तो व्यक्ति प्रभु को देने की जरूरत है. हम प्रभु को हर चीज देने की जरूरत है. पुराने नियम में, कुछ यहूदियों भगवान को सभी अनाज नहीं दिया. भगवान बेईमान लाभ से खुश नहीं था. भगवान हम इस जीवन में सब कुछ देखता है.


नीतिवचन 11:26

 अन्न का जमाखोर लोगों की गाली खाता, किन्तु जो उसे बेचने को राजी होता है उसके सिर वरदान का मुकुट से सजता है।

 

 

आमोस 8:5-7

 व्यापारियों, तुम कहते हो,
    “नवचन्द्र कब बीतेगा, जिससे हम अन्न बेच सकेंगे
सब्त कब बीतेगा,
    जिससे हम अपना गेहूँ बेचने को ला सकेंगे
हम कीमतें बढ़ा सकेंगे,
    बाटों को हलका कर सकेंगे,
और हम तराजुओं को ऐसा व्यवस्थित कर लेंगे
    कि लोगों को ठग सकें।
गरीब अपना ऋण वापस नहीं कर सकते अत:
    हम उन्हें दास के रूप में खरीदेंगे।
हम उऩ गरीबों को
    एक जोड़ी जूतों की कीमत में खरीदेंगे।
अहो! हम उस खराब गेहूँ को भी बेच सकते हैं,
    जो फर्श पर बिखर गया हो।”

यहोवा ने प्रतिज्ञा की। उसने “याकूब गर्व” नामक अपने नाम का उपयोग किया और यह प्रतिज्ञा की:
“मैं उन लोगों के किये कामों के लिये उन्हें क्षमा नहीं कर सकता।

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