बाइबल यह सिखाती है. मानवता देवतुल्य नहीं है, लेकिन पापी और भगवान लोगों से अलग ही मसीह में विश्वास के माध्यम से भगवान के साथ एक रिश्ता हो सकता है. अलग मसीह से मानवता,, खो जाती
रोमियों 5:12-19
12 इसलिए एक व्यक्ति (आदम) के द्वारा जैसे धरती पर पाप आया और पाप से मृत्यु और इस प्रकार मृत्यु सब लोगों के लिए आयी क्योंकि सभी ने पाप किये थे। 13 अब देखो व्यवस्था के आने से पहले जगत में पाप था किन्तु जब तक कोई व्यवस्था नहीं होती किसी का भी पाप नहीं गिना जाता। 14 किन्तु आदम से लेकर मूसा के समय तक मौत सब पर राज करती रही। मौत उन पर भी वैसे ही हावी रही जिन्होंने पाप नहीं किये थे जैसे आदम पर।
आदम भी वैसा ही था जैसा वह जो (मसीह) आने वाला था। 15 किन्तु परमेश्वर का वरदान आदम के अपराध के जैसा नहीं था क्योंकि यदि उस एक व्यक्ति के अपराध के कारण सभी लोगों की मृत्यु हुई तो उस एक व्यक्ति यीशु मसीह की करुणा के कारण मिले परमेश्वर के अनुग्रह और वरदान तो सभी लोगों की भलाई के लिए कितना कुछ और अधिक है। 16 और यह वरदान भी उस पापी के द्वारा लाए गए परिणाम के समान नहीं है क्योंकि दण्ड के हेतु न्याय का आगमन एक अपराध के बाद हुआ था। किन्तु यह वरदान, जो दोष-मुक्ति की ओर ले जाता है, अनेक अपराधों के बाद आया था। 17 अतः यदि एक व्यक्ति की उस अपराध के कारण मृत्यु का शासन हो गया। तो जो परमेश्वर के अनुग्रह और उसके वरदान की प्रचुरता का — जिसमें धर्मी का निवास है — उपभोग कर रहे हैं — वे तो जीवन में उस एक व्यक्ति यीशु मसीह के द्वारा और भी अधिक शासन करेंगे।
18 सो जैसे एक अपराध के कारण सभी लोगों को दोषी ठहराया गया, वैसे ही एक धर्म के काम के द्वारा सब के लिए परिणाम में अनन्त जीवन प्रदान करने वाली धार्मिकता मिली। 19 अतः जैसे उस एक व्यक्ति के आज्ञा न मानने के कारण सब लोग पापी बना दिये गये वैसे ही उस व्यक्ति की आज्ञाकारिता के कारण सभी लोग धर्मी भी बना दिये जायेंगे।