Translate

Showing posts with label इसलिए एसाव ने याकूब से कहा. Show all posts
Showing posts with label इसलिए एसाव ने याकूब से कहा. Show all posts

Saturday, November 14, 2015

पथ को तुच्छ

लोगों के जीवन के कई विचारों घृणा करेंगे। एक व्यक्ति को पृथ्वी पर जीवन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। लोग हम अस्सी साल के लिए रहते हैं कि पता ही नहीं है। तो फिर हम मर जाते हैं, अनन्त जीवन या अनन्त फटकार घटित होगा।

एसाव भविष्य के बारे में सोचते हैं और भगवान को अस्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि भगवान के साथ एक सूप का कटोरा के बजाय संबंध चाहता था। याकूब एक सही आदमी नहीं था, लेकिन वह भगवान वांछित।

एसाव भोजन के लिए उसका जन्मसिद्ध अधिकार दे दिया। पांच खुशी के बजाय मिनट भगवान का आशीर्वाद।

याकूब के बजाय सांसारिक सुख की भगवान का आशीर्वाद चाहता था।

हम भगवान की इच्छा है, भगवान का आशीर्वाद है और हम पृथ्वी पर जीवन का आनंद जाएगा।

एक व्यक्ति यीशु नहीं है, तो फिर हम पृथ्वी पर जीवन का आनंद नहीं होगा।



उत्पत्ति 25:30-34

 

30 इसलिए एसाव ने याकूब से कहा, “मैं भूख से कमज़ोर हो रहा हूँ। तुम उस लाल दाल में से कुछ मुझे दो।” (यही कारण है कि लोग उसे एदोम कहते हैं।)
31 किन्तु याकूब ने कहा, “तुम्हें पहलौठा होने का अधिकार [a] मुझको आज बेचना होगा।”
32 एसाव ने कहा, “मैं भूख से मरा जा रहा हूँ। यदि मैं मर जाता हूँ तो मेरे पिता का सारा धन भी मेरी सहायता नहीं कर पाएगा। इसलिए तुमको मैं अपना हिस्सा दूँगा।”
33 किन्तु याकूब ने कहा, “पहले वचन दो कि तुम यह मुझे दोगे।” इसलिए एसाव ने याकूब को वचन दिया। एसाव ने अपने पिता के धन का अपना हिस्सा यकूब को बेच दिया। 34 तब याकूब ने एसाव को रोटी और भोजन दिया। एसाव ने खाया, पिया और तब चला गया। इस तरह एसाव ने यह दिखाया कि वह पहलौठे होने के अपने हक की परवाह नहीं करता।